संतोष भारतीय की नजर में एसपी सिंह व एमजे अकबर
सुरेन्द्र प्रताप सिंह व एम.जे. अकबर , दो ऐसे शख्स हैं जिनके बारे में पत्रकारिता में रुचि रखने वालों को जानना ही चाहिए। पर यह भी सच है कि दोनों के बारे में सम्पूर्णता से शायद ही कोई बता सके। उतना ही बताया जा सकता है जितना अनुभव हुआ है। आज हमारे बीच एसपी नहीं हैं, पर वे जितने दिन, हमारे बीच रहे इतिहास बनाते रहे। अकबर हमारे बीच हैं लेकिन उन्होंने कभी अपने बारे में लिखा नहीं, न ही दूसरों ने उनके बारे में लिखा है। पत्रकारिता का सुनहरा काल इन दोनों को मिलाकर ही जाना जा सकता है। ये एम.जे. अकबर ही थे जो एस.पी. को कलकत्ता लाए, रविवार की जिम्मेदारी सौंपी, उन्हें आजाद छोड़ दिया और इस बात का अवसर दिया कि वे उन्हें संडे के सम्पादक के तौर पर अक्सर रविवार के सम्पादक के रूप में शह देते रहें। दोनों ने एक-दूसरे को शह दी पर सबसे खूबसूरत बात उनके रिश्ते की यह रही कि दोनों में से किसी ने एक-दूसरे को मात नहीं दी। सम्पादक के रूप में सुरेन्द्र प्रताप सिंह के काम करने की शैली किसी भी सम्पादक से अलग थी। काम करते समय वे धीर-गम्भीर रहते थे पर अचानक मजाक में गम्भीर बात कह देते थे, जब तक सामने वाला सोचे कि उ...